
गुवाहाटी (हिंस)। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (पूसी रेलवे) के प्रधान मुख्य बिजली इंजीनियर (पीसीईई) ने 17 से 19 मार्च तक ढेकीयाजुली रोड – उत्तर लखिमपुर, रंगापाड़ा नॉर्थ-डेकारगांव, बालिपारा- भालुकपोंग और हारमती – नाहरलगुन सहित प्रमुख सेक्शनों का व्यापक वैधानिक निरीक्षण किया। पूर्वोत्तर सीमा रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिलजल किशोर शर्मा ने बताया कि इस निरीक्षण में कुल 264.35 रूट किलोमीटर (आरकेएम) और 338.3 ट्रैक किलोमीटर ( टीकेएम) शामिल थे, जो कार्बन उत्सर्जन को कम करने और ऊर्जा दक्षता में सुधार करने में पूसी रेलवे की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। इसके बाद, अधिकतम अनुमेय सेक्शनल स्पीड पर एक इलेक्ट्रिक इंजन का ट्रॉयल सफलतापूर्वक किया गया, जिससे बेहतर परिचालन के लिए आधारभूत संरचना की तत्परता की पुष्टि हुई। परियोजना की मुख्य विशेषताओं में सुदृढ़ बिजली आपूर्ति संस्थापन शामिल हैं, जो बालिपारा और गहपुर में ट्रैक्शन सबस्टेशनों से एक स्थायी ऊर्जा स्रोत सुनिश्चित करते हैं । संरक्षा संवर्द्धन भी शामिल किए गए हैं, जो अब 130 समपार फाटकों पर ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) की सुरक्षा के लिए ऊंचाई गेज लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, सिग्नलिंग और दूरसंचार प्रणालियों को अपग्रेड किया गया है, जिसमें सभी स्टेशनों और स्विचिंग स्टेशनों में अब टीपीसी संचार प्रणाली है । बिश्वनाथ चारआली में दो ओएचई सह पीएसआई अनुरक्षण डिपो और एक टावर वैगन शेड के साथ अनुरक्षण सुविधाओं को मजबूत किया गया है, जिससे सुचारू संचालन सुनिश्चित होता है। 20 मार्च तक पूसी रेलवे ने 3360 रूट किलोमीटर (आरकेएम) का बिजलीकरण किया है, जो इसके कुल नेटवर्क 4260 आरकेएम का 79 फीसदी से अधिक है। यह उल्लेखनीय प्रगति भारतीय रेलवे के 100 फीसदी बिजलीकरण और नेट- जीरो कार्बन उत्सर्जन को प्राप्त करने के मिशन के अनुरूप है। बिजलीकरण कार्य विभिन्न मंडलों में किए जा रहे हैं, जिनमें असम 1806 आरकेएम के साथ सबसे आगे है, उसके बाद पश्चिम बंगाल में 936 आरकेएम, बिहार में 319 आरकेएम, त्रिपुरा में 269 आरकेएम और अरूणाचल प्रदेश में 11 आरकेएम हैं। बीते वित्त वर्ष 2023-24 में 921 आरकेएम विद्युतीकृत और वर्तमान वित्त वर्ष 2024-25 (20 मार्च तक ) में 777 आरकेएम विद्युतीकृत हुआ है। इस बिजलीकरण पहल से कई प्रकार के लाभ होने की उम्मीद है, जिसमें जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता में कमी, कार्बन उत्सर्जन कम होना और ट्रेन परिचालन में बेहतर दक्षता शामिल है। इन संवर्द्धनों को लागू करके, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे आधुनिक, टिकाऊ रेलवे परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहा है, जिससे एक हरित और अधिक कुशल रेल नेटवर्क के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत किया है।
